हमारी उपलब्धियां

1.सूचना के अधिकार कानून के अन्तर्गत शिप्रा नदी के नक्शे निकालकर कराया सीमांकनः- श्री सदगुरु ग्रामिण विकास एवं अनुसंधान परिषद् इन्दौर द्वारा वर्ष 2004 से शिप्रा पुर्नजीवन अभियान चलाया जा रहा है जिसके अन्तर्गत नदी पुर्नजीवन हेतु किसानो को जल सरंक्षण हेतु तालाबो का निर्माण करना पौधा रोपण करने के साथ साथ एक महत्वपूर्ण कार्य संस्था द्वारा किया गया है। शिप्रा नदी उद्गम स्थल उज्जैनी (मुन्डला दोस्तदार) से 13 कि.मी. नदी के नक्शो को सूचना के अधिकार में प्राप्त कर नदी का सीमांकन कराया गया पहले शिप्रा उद्गम पहाडी से एक छोटी सी धारा के रुप में नदी का स्वरुप दिखता था परन्तु उद्गम के ठीक नीचे सोनवाय पिवडाय गांव में नदी की मूलधारा पर किसानो ने अपने खेत बना लिए और जल की उपलब्धता ना होने से नदी की सीमा में कब्जा कर लिया गया। वर्ष 2004 में संस्था के अध्यक्ष डाॅ विकास चैधरी ने शिप्रा पुर्नजीवन अभियान प्रारंभ किया एवं नदी की खोज प्रारंभ की। शिप्रा नदी उद्गम क्षैत्र में 13 कि.मी. विलुप्त थी जिसमें पुर्नजागरण का कार्य शुरु हुआ वर्ष 2009 में सूचना के अधिकार के अन्तर्गत सम्पूर्ण नदी के नक्शे निकाले गये तत्पश्चात तत्कालिन कलेक्टर राकेश श्रीवास्तव जी के आदेश से नदी उद्गम तथा प्रभाव क्षैत्र का सीमांकन किया गया। शिप्रा पुर्नजीववन अभियान को शक्ति मिली अब अभियान सफलता की और बडता गया आज उसी नक्शे के आधार पर सीमांकित नदी में शिप्रा का स्वरुप स्थापित हो सका हैं।

2.शिप्रा उद्गम क्षैत्र में बने 1450 तालाब:- शिप्रा पुर्नजीवन अभियान में संस्थाअध्यक्ष की मेहनत बनी किसानो की प्रेरणा सिंहस्थ 2004 में शिप्रा में जल की कमी और गम्भीर नदी के जल से स्नान होने पर साधु संत सरकार से नाराज हो गये थें परन्तु स्वामी अवधेषानन्द गिरि जी महाराज की अगवाई में सिहस्ंथ में जल संसद का आयोजन किया गया था। जिसमें हजारो लोगों ने भाग लिया था जहां कुछ प्रस्ताव पारित किये गये थे। जिसमें एक प्रस्ताव था उद्गम से बहे शिप्रा एवं शिप्रा उद्गम के जल से हो स्नान सिहंस्थ के तुरन्त बाद षिप्रा उद्गम क्षैत्र में संस्था के सामाजिक कार्यकर्ताओ ने कार्य प्रारंभ कर दिया जिसमें संस्था अध्यक्ष डाॅ विकास चैधरी प्रमुख है। सबसे पहले नदी पुर्नजीवन हेतु जल संरक्षण की आवश्यकता लगी तो नदी के तटीय क्षैत्रो में छोटे छोटे तालाबो का निर्माण किसानो की सहायता से शुरु किया यह अभियान आगे बडता गया। शिप्रा उद्गम स्थल के आसपास के 36 गावंों में जल के महत्व को समझते हुए किसानो ने तालाबो की श्रृखला बना दी शिप्रा पुर्नजीवन की भावना को लेकर क्षैत्र में जल क्रान्ति आ गई। उद्गम क्षैत्र में शिप्रा जय जयवन्ती नदी किनारे के 36 गावों में 1450 तालाबो का निर्माण हुआ। और इस उपलब्धि में संस्था की महत्वपूर्ण भूमिका है।विगत 13 वर्षो से लगातार संस्था के कार्यकर्ताओ ने मेहनत से शिप्रा और जय जयवन्ती नदीयों के अस्तित्व को बचाने के लिए प्रयास किये।

3.शिप्रा उद्गम क्षैत्र के गावों सेमलिया रायमल में 236 तालाबो के निर्माण का बना विश्व रिकार्ड:- संस्था द्वारा वर्ष 2004 में प्रारम्भ किये गये शिप्रा पुर्नप्रवाह अभियान के अन्तर्गत शिप्रा उद्गम क्षैत्र के ग्राम सेमलिया रायमल में किसानो के सहयोग से संस्था ने जल संरक्षण अभियान प्रारम्भ किया जिसके परिणामस्वरुप एक ही गावं में 236 तालाबो का निर्माण एक विश्व रिकार्ड है। दुनिया में सेमलिया रायमल एक मात्र ऐसा अनोखा गावं है। जहां इतनी बडी संख्या में तालाब है।

4.शिप्रा जय जयवन्ती नदियों के दोनों किनारो पर हरियाली चुनरी अभियान संस्था द्वारा वर्ष 2004 से ही:- शिप्रा उद्गम पहाडी और नदी के दोनो किनारो पर किसानो के सहयोग से पोधा रोपण का वृहद अभियान चलाया जा रहा है जिसे हरियाली चुनरी अभियान के नाम से जाना जाता है। जिसके अन्तर्गत अभी तक सवा लाख पौधो को पेड बना दिया गया है। यह अभियान लगातार जारी है। विगत बारिश के मौसम मे ग्यारह हजार पौधो का रोपण शिप्रा जय जयवन्ती नदीयों के किनारे के गांव में किया गया है। और सिहस्थ 2016 के अवसर पर पुरी शिप्रा नदी पर संस्था द्वारा हरियाली चुनरी अभियान के अन्तर्गत 50,000 बांस के पौधे लगाये गये। जिसके अन्तर्गत शिप्रा की सहायक नदी जय जयवन्ती भी शमिल है।

शीप्रा जयजयवन्ति नदी के दोनो तटो पर संस्था द्वारा वर्ष 2004 से वर्ष 2017 तक किया गया पौधारोपण (हरियाली चुनरी अभियान)

क्र वर्ष पोधो की संख्या पोधो की प्रजाति स्थान सहयोगी संस्था
1

2

3

4

5

6

7

8

9

10

11

12

13

14

2004

2005

2006

2007

2008

2009

2010

2011

2012

2013

2014

2015

2016

2017

101

2100

3000

3100

5500

4100

5000

3000

2500

5100$10,000 (पारिजात)

5000

5100

50000

11000

जाम, सीताफल, नीम, पीपल, बरगद, आवंला, जामुन, शहतुद, खमेंद, इमली, बहेडा, नीबंु, पारी जात, गुलमोहर पेंटाफार्म आम गुडहल, गुलर, कटहल, आदि शिप्रा जयजयवन्ति नदी किनारे के 36 गांवो शिप्रा उद्गम स्थल उज्जैनी, मुण्डला दोस्तदार, सोनवाय भींगारीया, पिवडाय, कम्पेल, मोरदहाट, अरनिया, धुलेट, बावलिया,शाहदादेव, आसाखेडी, मुण्डी, धतुरिया,गोगाखेडी, उन्डैल फली सेमलिया रायमल तेलिया खेडी, नाहर झाबुआ, गेहली,
पारिजात हिल्स (गवालु)
सेमलिया चाउ, भोकाखेडी, आकियागारिया,सेत खेडी खुडेल खुर्द , खुडेल बुजुर्ग, रामू खेडी, मुण्डला जेतकरन, काजी पलासिया अम्बा मोलिया सिंधी बरोदा, असरावद बुजुर्ग, धमनाय, सोनगुराडिया, कपालिया खेडी एवं रणतभवंर पर्वत (जयजयवन्ति नदी का उद्गम स्थल) पर पौधारोपण किया गया।
1.शिप्रा जयजयवन्ति नदी किनारे के समस्त गांव में नदी रक्षक उपसमितियां

2.समस्त गांवो में म.प्र. जनअभियान परिषद की ग्राम प्रस्फुटन समितियां

3.समस्त गावों में किसान संघ की ग्राम स्तर की समितियां

4.समस्त ग्राम पंचायते एवं वन समिति

5.समस्त गावों में महिला मण्डल एवं युवा मण्डल

14 114601

5.नदी किनारे के गावंो में टी.बी. मुक्ति का महा अभियान:- शिप्रा जय जयवन्ती नदी किनारे के 36 गावं में टी.बी. की बिमारी से मुक्ति का महा अभियान चलाया जा रहा है। जिसमें विगत 1 वर्ष से लगातार इन गावो में सर्वे कर टी.बी. के लक्षण पाये जाने पर मरीजो की जांच एवं उपचार निशुल्क किया जा रहा है। संस्था यह कार्य सी.ई.टी. आई. संस्था के सहयोग से कर रही है। कुछ सामाजिक कार्य के विद्यार्थी भी इस कार्य में सहयोग कर रहे है। 36 गावों में से 4 गावं पुर्ण टी.बी. मुक्त गावं बन चुके हैंे। विगत दो वर्षो में इन गावो में कोई भी टी.बी. का नया मरिज नही निकला है। और पुराने मरिजो को उपचार करके पुर्ण स्वस्थ्य किया जा चुका है।

6.अब नदी के समुदाय में स्वरोजगार क्र्र्रान्ति:- संस्था द्वारा शिप्रा जय जयवन्ति नदी तट के 36 गावंो के समुदाय के लिए विभिन्न प्रकार के स्वरोजगार कार्यक्रम चलाए जा रहे है। जैसे नदी सभ्यता का अध्ययन, प्राचीन जल तीर्थो का पुर्नजागरण , स्वंय सहायता समुह के माध्यम से महिला स्वरोजगार में ब्युटी पार्लर प्रशिक्षण, सिलाई प्रशिक्षण, मिट्टी के बरतन बनाने वाले, टोकने बनाने वाले, झाडु बनाने वाले, लकडी का सामान बनाने वाले कारिगरो को प्रशिक्षित करके स्वरोजगार मेलो में स्टाल लगाकर संस्था के माध्यम से हस्तशिल्प का विकास किया जा रहा है। इससे नदी समुदाय के लोगो की आय में वृद्धि हुई है। उनका जीवन स्थल परिवर्तित हुआ है। इस क्षैत्र में नवाचार के प्रयोग भी किये गये है जैसे किसानो को जैविक कृषि में बडावा देकर उन्नत खेती के प्रयोग करना कटंगाबास की खेती, मशरुम उत्पादन से किसानो की आय में वृद्धि के साथ साथ नदी का सरंक्षण भी किया जा रहा है।

7.शिप्रा पुर्नजीवन अभियान में पदयात्रा का बडा योगदान:- संस्था द्वारा वर्ष 2004 से अभी तक प्रतिवर्ष सावन माह में नदी पुर्नजीवन पदयात्रा का आयोजन किया जाता है। जिसमें उद्गम स्थल उज्जैनी से 13 कि.मी. विलुप्त क्षैत्र शिप्रा कुण्ड अर्निया आश्रम तक नदी तट पर पदयात्रा की जाती है पदयात्रा के माध्यम से नदी तट के 36 गावों में नदी संरक्षण के लिए जन जार्गति हुई है और नदी समुदाय की अपनी एक पहचान बनी है।

8.नदी किनारे के 36 गावों में 1000 महिलाओ का प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा कराया (खुडेल खुर्द गावं में 50 महिलाओ को रक्षाबंधन पर उपहार स्वरुप बीमा वितरण):- शिप्रा जयजयवन्ति नदी किनारे के 36 गावों की मजदुर और असहाय महिलाओ, गरीब, विधवा, परित्कता महिलाओ को रक्षाबंधन पर प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा का उपहार संस्था श्री सदगुरु ग्रामीण विकास एवं अनुसंधान परिषद द्वारा भेंट किये गये।

9.रद्दी सग्रंह अभियान से नदी समुदाय के गरीब बच्चो में शिक्षा का उजियारा:- नदी समुदाय के गरीब बच्चो, पन्नी बिनने वाले, भीख मांगने वाले, शनि महाराज मांगने वाले, 126 बच्चो को इस कार्य से हटाकर शाम 5 से 7 बजे तक प्रतिदिन पढाया जा रहा है उन्हें अच्छा भोजन अच्छा स्वास्थ्य और अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। और इसका खर्च इन्दौर शहर में रद्दी सग्रंह अभियान चलाकर किया जा रहा है। शहर के नागरिको की घर घर पहुंचकर अखबारी कागज की रद्दी दान लेकर उसे बेचकर प्राप्त रुपयों से कर रहे है शिक्षा का उजियारा ।

10.नदी किनारे के 36 गांव में बेटी बचाओ अभियान:- संस्था द्वारा विगत 13 वर्षो से क्षिप्रा जयजयवन्ति नदी किनारे के गांव में बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान चलाया जा रहा है इसके अन्तर्गत नदी किनारे के 36 गावों में प्रत्येक गर्भवती महिला की पुर्णतःगर्भावस्था में निगरानी की जाती है। और उसके स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए आंगनवाडी आशा कार्यकर्ता के सहयोग से सतत नो माह गर्भावस्था में गर्भवती महिला की निगरानी एवं देखभाल की जाती है। इससे सम्पूर्ण नदी क्षैत्र में कन्या भु्रण हत्या पूर्णतः बन्द हो चुकी है। एवं बेटियो की पढाई पर भी समाज में जन जागृति आई है।

11.शिप्रा जयजयवन्ति नदी उद्गम क्षैत्र के आठ पहाडो की अवैध खुदाई को बन्द कराया:- सस्ंथा द्वारा विगत 13 वर्षो में क्षिप्रा जयजयवन्ति नदी उद्गम क्षैत्र के आठ पहाडो क्षिप्रा उद्गम स्थल की कनकश्रृगां पहाडी, जयजयवन्ति नदी उद्गम स्थल रणतभवंर पर्वत, रेणुका टेकरी, आठमिल पहाडी, उमरिया पहाडी, सनावदिया पर्वत, देवगुराडिया पर्वत, रालामण्डल की पहाडी पर की जा रही अवैध खुदाई को बन्द कराया और पहाडो के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया। पहाड नदियो के घर होते है। और बारिश के मौसम में बादलो को रोककर बरसात होने के लिए दिशा तय करते है। जिससे नदियों का जन्म होता है। इसलिए पहाडो को बचाना अतिमहत्वपूर्ण है।