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श्री सदगुरु ग्रामिण विकास एवं अनुसंधान परिषद्

सृष्टि के निर्माण में हमारे धर्म शास्त्र में पंच तत्व पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश को महत्व दिया गया है। इसमें जल शब्द को प्राणी जीवन, प्रकृति अर्थात् समस्त सृष्टि के लिए अतिआवश्यक तत्व के रूप में स्थान दिया गया है। अनादी काल से जल शब्द को समाज में एक देवता के रूप में महत्व दिया जाता है और हमारी संस्कृति में नदियों को मां के स्वरूप में पूजा जाता है। अर्थात् नदियां पालन पोषण करने वाली व्यवस्था का ही एक हिस्सा है,